सोमवार, 4 अक्तूबर 2010

दिनांक सितम्बर के दैनिक भास्कर समाचार पत्र में श्री राजदीप सरदेसाई ने माननीय श्री सुरेश कलमाड़ी पर आधारित एक लेख लिखा थालेख तो अच्छा था लेकिन इसमें श्री सरदेसाई ने कुछ यूँ भी लिखा कि " यह हमें उन आरामपसंद जीवो के लिए छोड़ देना चाहिए तो ट्विट करते रहते हैं।" यह कुछ जमा नहींआजकल लगभग सभी प्रमुख अखबार उन्ही सेलेब्रिटी की पंक्तियाँ प्रकाशित कर रहे है जो अत्यंत व्यस्त होने के बाद भी अपने विचार लिखते रहते हैतो इस टिपण्णी पर आप लोगो कि कोई टीप?

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